Home » Kids Magazine » 40 के बाद रिटायर होने का नुस्खा है ‘फ्रूगेलिज्म’
Lars Hattwig

40 के बाद रिटायर होने का नुस्खा है ‘फ्रूगेलिज्म’

उम्र के चौथे दशक में रिटायर होने के लिए आप कितना त्याग कर सकते हैं। जितना संभव हो सके बचत करने पर आधारित जीवनशैली ‘फ्रूगेलिज्म’ (Frugalism) जर्मनी के कई लोगों में लोकप्रिय है।

लार्स हैटविग (Lars Hattwig) ने धुम्रपान ही नहीं छोड़ा, बल्कि छुट्टियों तथा दोस्तों के साथ बाहर घुमने को भी उन्होंने त्याग किया। जर्मनी की राजधानी  बर्लिन के उनके छोटे से अपार्टमैंट में एकमात्र लाइट बल्ब जलता था और मेहमानों से भी कम से कम पानी इस्तेमाल करने को कहते थे। यह सब वह नौकरी करने की मजबूरी से मुक्ति पाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कर रहे थे।

अब 47 वर्ष के हो चुके हैटविग को रिटायरमैंट लिए 3 वर्ष हो चुके हैं। वह ‘फ्रूगेलिज्म’ यानी अत्यधिक मितव्ययिता को समर्पित जर्मन लोगों की बढती संख्या में से एक हैं। यह ऐसा सिद्धांत है जो एकदम सरल तथा सादा जीवन जीने से जुड़ा है।

Frugalism is about getting more out of life by maximizing value for one’s dollars over time, since life is time and time is money.

खुद को ‘फ्रूगेलिस्ट्स’ कहने वाले लोग जितना अधिक हो सके बचत करते हैं और अक्सर शयरों तथा फंड्स में उसका निवेश करते हैं। सफल रहें तो धीरे- धीरे उनके पास इतना धन हो जाता है कि फिर उन्हें जीवन भर काम करने जरूरत नहीं रहती।

जर्मनी के अर्थशास्त्री कहते हैं कि 2008 की वैश्विक मंदी के बाद अमेरिका में ‘फ्रूगेलिज्म’ (Frugalism) शुरू हुआ।  इसके बाद कई अमेरिकी पैसे बचाने के प्रति अत्यधिक जागरूक हो गए और अत्यधिक मितव्ययी जीवनशैली उनकी मदद करने लगी।

हालांकि, बर्लिन में रहने वाले हैस्टिंग ने वित्तीय आजादी हासिल करने का सपना उसी वक्त देखना शुरू कर दिया था जब अचानक उनके पास पैसों की कमी हो गई। 2003 में ATM से पैसे निकालने की कोशिश करते हुए उन्हें पता चला कि उनके खाते में कुछ नहीं था। तब उनके मन में  दो बातों पर मंथन  शुरू हुआ कि कौन उन्हें 50 यूरो उधार दे सकता है और दूसरा क्यों वह हर महीने अपना सारा खाता  खाली कर रहे थे।

कुछ तो बदलना पड़ेगा

हैटविग बताते हैं, “एक मौसम विज्ञानी के रूप में मेरा वेतन बुरा नहीं था लेकिन मैं सारी कमाई खर्च कर देता था। मैं समझ गया कि मुझे कुछ तो बदलना पड़ेगा।”

तुरंत वह अपने वेतन के एक हिस्से को इक्किटी और फिर म्युचुअल फंड्स में निवेश करने लगे। जल्द ही उनके पास 40 लाख रुपए जमा हो  गए परंतु तभी  2008 का वैश्विक वित्तीय संकट आ गया। वह  कहते हैं, “अचानक, मैने  सब कुछ खो दिया। इसके बाद मैंने ‘फ्रूगेलिज्म’ (अत्यधिक मित व्ययिता) को अपना लिया।”

मूल्य घटने के बावजूद उन्होंने अपना निवेश बनाए रखा और वक्त के साथ फिर से उसका मूल्य पहले जैसा हो गया। लगभग सभी गैरजरूरी खर्चे बंद करने के बाद वह हर महीने वेतन का 70 प्रतिशत तक बचा सकते थे।

समझदारी से खर्च करते हैं जर्मन

2017 में एक अध्ययन के अनुसार समझदारी से खर्च करने की अपनी आदतों के लिए विख्यात जर्मनी के दस में से एक परिवार अपनी बचत से लगभग 13 वर्ष तक वर्तमान जीवन स्तर जी सकता है। पांच प्रतिशत परिवार तो दो दशक तक अपनी बचत पर गुजारा करने में सक्षम हैं।

दूसरी ओर, करीब 30 प्रतिशत परिवार ऐसे भी हैं जिनकी बचत कुछ हफ्तों या महीनों में ही खत्म हो जाएगी। इनमें अधिकतर एकल  माता-पिता और उनके बच्चे शामिल हैं।

‘फ्रूगेलिज्म’ (मितव्ययवाद) की मदद से कितने लोगों ने सम्पदा अर्जित की अथवा वित्तीय आजादी पाई है, इस बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। हैटविग का अनुमान है कि आबादी का केवल एक छोटा-सा हिस्सा ही इस तरह की कठिन जीवनशैली जी सकता है जैसी कि उन्होंने  कई सालों तक जी है। कम आय  वालों के लिए तो ऐसी जीवनशैली और भी कठिन होगी क्योकि वित्तीय आजादी प्राप्त करने के लिए उन्हें दशकों लग जाएंगे जरूरी है कि व्यक्ति की आय मूलभूत आवश्यकताओं के लिए जरूरी आय से अधिक हो परंतु ऐसे बहुत अधिक लोग नहीं हैं और आकस्मिक घटनाएं अथवा झटके भी लग सकते हैं जैसे नौकरी चली जाना या लंबी बीमारी। अधिक कमाई करने  वाले उन लोगों के लिए भी अत्यधिक बचत असंभव है जो हर चीज बेहतरीन चाहते हैं।

हैटविग के अनुसार कुछ वक्त आपकी कमाई का आधा हिस्सा बचाने से धन के प्रति आपकी धारणा बदलने लगती है।

2015 में रिटायरमैंट ले चुके हैटविग का गुजारा अब अपनी बचत तथा निवेश के ब्याज पर आसानी से हो रहा है और इच्छा होने पर ही कभ-कभार काम करते हैं। आज भी वह मितव्ययी हैं परंतु पहले जितने नहीं और बीच-बीच में रेस्तरां में खाना-पीना तथा सैर-सपाटे का भी आनंद लेते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *