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International Tiger Day

International Tiger Day Information For Students

Global Tiger Day: Annual celebration to raise awareness for tiger conservation, held annually on 29 July. It was created in 2010 at the Saint Petersburg Tiger Summit. The goal of the day is to promote a global system for protecting the natural habitats of tigers and to raise public awareness and support for tiger conservation issues.

International Tiger Day: By Year

Year 2017

The seventh annual Global Tiger Day was celebrated in various ways around the world. Local events have been organized in Bangladesh, Nepal, and India as well as non-tiger-range countries such as England and the United States. Some celebrities also participated by removing their social media profile photos. WWF continued its promotion of the “Double Tigers” campaign through investing in rangers. Several companies partnered with WWF to help raise awareness.

Year 2018

More awareness in the entire world of tiger populations and the challenges for their conservationists. India counts the number of wild tigers every four year and show a promising rise from 1411 in 2006 to 2226 in 2014.

On International Tiger Day (29 July, 2019), Prime Minister Narendra Modi released the results of 4th cycle of the All India Tiger Estimation. The All India Tiger Estimation Report 2018, says India, with around 3,000 tigers, is one of safest habitats for them in world. Three fourths of the world’s tigers can be found in India. Prime Minister lauded the collective efforts of all stakeholders, that has resulted in this tremendous increase in Tiger population.

Prime Minister Narendra Modi hailing India’s Sankalp se siddhi mantra that has led to a 33% increase in tiger population in India since 2014. He released The All India Tiger Estimation Report 2018. The report states that three fourths of the world’s tigers can be found in India. Prime Minister lauded the collective efforts of all stakeholders that has resulted in this tremendous increase in Tiger population. He described it as an apt example of sankalp se siddhi.

PM Modi said it is possible to strike a healthy balance between – development and environment. Be they policies or economics a change in the conversation about conservation is needed. He expressed confidence that India will proposer both economically and environmentally. This balance is what will contribute to a strong and inclusive India. Over the last 5 years forest cover across the country has increased as rapidly as has the expansion of Next generation Infrastructure

Protected Areas have increased since 2014 from 692 to more than 860 in 2019. The number of Community Reserves has gone up from 43 in 2014 to over 100 today. India has emerged as a leader in the sphere of climate action. The country has achieved several global emission reduction and clean fuel goals much before the set deadlines. India has already achieved the Sustainable Development goal for cutting Emission Intensity of GDP goals by 20-25%.

and is a leader amongst nations striving to transition to clean fuel and renewable fuel based economies. PM Modi called for a balanced smart and sensitive approach to conservation.

Forest and Environment Minister Prakash Javadekar attributed the success of Project tiger to the nature being a part of our cultural heritage.

PM also presented an award to Sathyamanglam Tiger Reserve, for showing the highest increment in the quadrennial Management Effective Evaluation.

India is emerging as not just the fastest growing economy but also a conservation hub clearly illustrating that it is possible to strike a healthy balance between the two.

कब हुई टाइगर-डे की शुरुआत, विश्‍व में कितनी प्रजातियां हैं मौजूद

बाघों की घटती संख्या और इसके संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day) मनाया जाता है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के मुताबिक 2014 में आखिरी बार हुई गणना के अनुसार भारत में 2226 बाघ हैं। जो कि 2010 की गणना की तुलना में काफी ज्यादा हैं। 2010 में बाघों की संख्या 1706 थी।  नए आंकड़ों के मुताबिक, देश में बाघों की संख्या 2967 पहुंच गई हैं। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन 2018 जारी किया। इसके मुताबिक 2014 के मुकाबले बाघों की संख्या में 741 बढ़ोत्तरी हुई है।

कब हुई मनाने की शुरुआत

बाघ संरक्षण के काम को प्रोत्साहित करने, उनकी घटती संख्या के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित एक शिखर सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने की घोषणा हुई थी। इस सम्मेलन में मौजूद कई देशों की सरकारों ने 2020 तक बाघों की आबादी को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया था।

वैश्विक आबादी:

वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड (WWF) के मुताबिक दुनिया में लगभग 3,900 बाघ ही बचे हैं। 20वीं सदी की शुरुआत के बाद से वैश्विक स्तर पर 95 फीसद से अधिक बाघ की आबादी कम हो गई है। 1915 में बाघों की संख्या एक लाख से ज्यादा थी।

घटती आबादी की वजह:

इसके कई कारण हैं। वन क्षेत्र घटा है। इसे बढ़ाना और संरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती है। चमड़े, हड्डियों एवं शरीर के अन्य भागों के लिए अवैध शिकार, जलवायु परिवर्तन जैसी भी चुनौतियां शामिल हैं।

  • बाघों की जिंदा प्रजातियां: साइबेरियन टाइगर, बंगाल टाइगर, इंडोचाइनीज टाइगर, मलायन टाइगर, सुमात्रन टाइगर
  • विलुप्त हो चुकीं प्रजातियां: बाली टाइगर, कैस्पियन टाइगर, जावन टाइगर

प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger)

1973 में तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने टाइगर प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य भारत में उपलब्ध बाघों की संख्या के वैज्ञानिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और पारिस्थिक मूल्यों का संरक्षण सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत अब तक 50 टाइगर रिजर्व बनाए जा चुके हैं।

दुनिया के लिए आदर्श बनता भारत

भारत में बाघों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि पिछले कुछ सालों में भारत ने अन्य देशों की तुलना में बाघ संरक्षण पर काफी मेहनत की है।

उत्तराखंड भारत के बाघों की राजधानी के रूप में उभर रहा है। उत्तराखंड के हर जिले में बाघों की उपस्थिति पायी गयी है। वन विभाग के साथ-साथ राज्य सरकार इन अध्ययनों से काफी उत्साहित है और केन्द्र सरकार को इस संबंध में रिपोर्ट भेजेगी। उत्तराखंड में 1995 से 2019 के बीच किये गये विभिन्न शोधों व अध्ययनों से इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया है। इस दौरान विभिन्न डब्ल्यूआईआई के रिपोर्टों के अलावा विभिन्न समय में लगाये गये कैमरा ट्रेपों व मीडिया रिपोर्टों को आधार बनाया गया है।

वन कर्मचारियों और ग्रामीणों द्वारा बाघों के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष साक्ष्य जैसे पगमार्क, चिन्ह इत्यादि को भी आधार बनाया गया है। उन्होंने कहा कि भौगालिक रूप से देखा जाय तो उत्तराखंड उच्च हिमालय, मध्य हिमालय के अलावा तराई के मैदानी हिस्सों में बंटा हुआ है। खास बात यह है कि इन तीनों हिस्सों में बाघों की उपस्थिति के संकेत मिले हैं।

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