रामबाण से कम नहीं ऊंटनी का दूध

रामबाण से कम नहीं ऊंटनी का दूध

वैज्ञानिक स्तर पर साबित हो चुका है कि ऊंटनी का दूध वास्तव में अनेक रोगों को दूर रखने में सक्षम है। इस दूध में विशेष प्रकार के प्रोटीन, मिनरल्स और विटामिन्स होने के कारण यह बेहद सेहतमंद है। यह कैल्शियम, पोटाशियम, आयरन, विटामिन ‘सी’, ‘बी-2’, ‘ए’ व ‘ई’ का अच्छा स्रोत है।

29 नवम्बर 2016 को फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड्स अथॉरिटी (एफ.एस.एस.ए.) ने ऊंटनी के दूध को फूड आइटम घोषित किया था।

डायबीटीज (Diabetes), टी.बी. (Tuberculosis) जैसी कितनी बिमारियों में ऊंटनी का दूध लाभदायक है। अध्ययनों में पता चला है कि ऊंटनी का दूध पीने वाले डायबिटीज टाइप-1 और 2 रोगियों में इंसुलिन की जरूरत कम हो जाती है। टी.बी. के रोगियों को भी ऊंटनी का दूध पिलाने पर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है।

इन रोगों के इलाज में कारगर

ऑटिज्म, डायबिटीज, तपेदिक (टी.बी.), कैंसर (फेफड़े, गले, किडनी, आंत, ब्लैडर, प्रोस्टैट, ओवरी, ब्लड) व ट्यूमर का फैलाव रोकने में। डायरिया (बच्चों में), हैपेटाइटिस, एलर्जी, लैक्टोस इंटॉलरैंस (दुग्ध उत्पादों से एलर्जी) व अल्कोहल से डैमेज हुए लीवर के इलाज में भी लाभदायक है।

ऑटिज्म रोगियों को लाभ

बच्चों में होने वाली न्यूरो संबंधी बीमारी ‘ऑटिज्म (Autism)’ के मरीज तो इससे तो इससे ठीक भी हो रहे हैं। अमेरिका की क्रिस्टिना एडम्स ने ‘ऑटिज्म’ से गस्त अपने बेटे को यह दूध दिया और उसकी स्थिति में आश्चर्यजनक सुधार पाया। अब इसे लेकर वह सभी को जागरूक कर रही हैं। उनकी पहल पर ही अमेरिका में ऊंटनी के दूध के आयात की अनुमति दी गई है।

शोध में भी सामने आया है कि ऊंटनी के दूध को नियमित पिया जाए तो ‘ऑटिज्म’ के लक्षणों में कमी आने लगती है। इससे मानव शरीर को फायदा पहुंचाने वाले गुणों को लेकर हुए शोधों के नतीजे उम्मीद जगाने वाले हैं।

4 वर्ष की ऑटिज्म पीड़ित बच्ची को लगातार 40 दिन तक ऊंटनी का दूध देने पर ऑटिज्म के लक्षण दिखना बंद हो गए। इसी तरह लगातार 30 दिन तक ऊंटनी का दूध लेने पर ऑटिज्म पीड़ित 15 वर्षीय लड़का रोग से मुक्त हो गए। 21 साल के युवक ने करीब दो हफ्तों तक ऊंटनी का दूध पिया तो उसके ऑटिज्म के लक्षणों में कमी देखी गई।

शोध में पता चला है कि ऊंटनी के दूध में मौजूद ‘कैसीन प्रोटीन (Casein Protein)’ में ऑटिज्म कारण बनने वाले तत्व नहीं होते हैं। पाया गया है कि बच्चे की उम्र जितनी कम होगी ऊंटनी का दूध उतना अधिक फायदा करेगा। शोध में 15 वर्ष की तुलना में 10 साल के बच्चे में इसके काफी सकारात्मक परिणाम देखने को मिले।

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क्योंकि ऊंटनी के दूध में इतनी ताकत?

माना जाता है कि कठिन परिस्थिति में रहने के कारण ऊंटनी के दूध में विशेष प्रकार का प्रोटीन एवं अत्यधिक मात्रा में मिनरल्स होने के कारण मानव स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

ऊंटनी के दूध में पाए जाने वाले एमिनो एसिड की जो विशेषताएँ हैं वे अन्य पशुओं के दूध में नहीं हैं।

यह भी माना जाता है कि अरावली के जंगलों में करीब 36 तरह की प्रजातियों के औषधीय पौधे खाने के कारण उस इलाके की ऊंटनियों का दूध इन सभी पौधों के औषधीय गुणों से भरपूर है।

ऊंटनी के दूध में पाए जाने वाले तत्व सर्वाधिक सुपाच्य हैं। इन तत्वों के पाचन के बाद रक्त में मिलने के बाद प्रतिरोधक प्रभाव होता है। इसका कारण विशेष प्रकार के प्रोटीन एवं रसायन होना है।

कैसे पीएं ऊंटनी का दूध?

ऊंटनी के दूध को कच्चा ही पिया जाता है, इसे गर्म करने से इसके खास तत्व नष्ट हो जाते हैं।

हो रहे हैं कई शोध

ऊंट के सीरम से थायरॉइड कैंसर, डायबिटीज, टी.बी., एड्स जैसे रोगों के इलाज पर एस.पी मैडीकल कालेज, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र आदि मिलकर काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र मानव शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता में उपयोगिता पर काम कर रहा है।

सांप के काटे का भी इलाज

ऊंट के सीरम से सर्पदंश की जहर रोधी दवा बनाई गई है। बांडी सांप के काटने पर रोगी को 5 से 10 वाइल देने पर ही वह ठीक ही जाता है। इस दवा के 25 हजार टैस्ट हो चुका हैं।

ऊंटों की मुख्य नस्लें

राजस्थान में ऊंटों की 6 मुख्य नस्लों में जैसलमेरी, मेवाड़ी, बीकानेरी, मारवाड़ी, मेवाती तथा मालवी शामिल हैं। राजस्थान में परम्परागत रूप से ऊंट पालक राइका समुदाय के लोग ऊंटनी का दूध पीते हैं और उन्हें डायबिटीज नहीं होती।

कम हो रहे हैं ऊंट

ऊंटनी के दूध के इतने फायदे होने के बावजूद इनका लाभ लेने पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है और राजस्थान में ऊंटों की संख्या लगातार कम हो रही है। सरकारी आंकड़ों के ही अनुसार 1997 में राजस्थान में ऊंटों की संख्या 6,68,000 और 2003 में 4,98,000 थी। 2008 में इनकी संख्या 13 प्रतिशत घटकर 4,30,426 रह गई।

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