Stories in Hindi

प्रतिशोध: नारी उत्पीड़न की कहानी – मंजरी शुक्ला

प्रतिशोध - नारी उत्पीड़न की कहानी

दूर से आती आवाज़ को कभी गौर से सुनना नहीं पड़ा और जो सामने था उसकी स्पष्ट आवाज़ कभी कानों में आई नहीं। क्या, क्यों और कैसे शब्दों का कोई अर्थ नहीं रह गया था। किसी शान्त नदी के किनारे या उफ़नते समुद्र के ज्वर भाटे उसे एक सा ही सुकून देते थे। उसे खुद भी नहीं पता होता कि …

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नन्हे दोस्त: पक्षियों के लिए दाना-पानी की बाल-कहानी

नन्हे दोस्त: पक्षियों के लिए दाना-पानी की बाल-कहानी

“पूरी कॉलोनी में बस एक यही पेड़ बचा है हमारे लिए” नीतू गौरिया ने चुलबुल तोते से कहा। “मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा है कि सब लोग पेड़ कटवा क्यों रहे है” चुलबुल ने दुखी होते हुए कहा। “अरे, तुम दोनों कहाँ चले गए थे?” पेड़ के झुरमुट से टिन्नू गिलहरी की आवाज़ आई। नीतू चहकते हुए बोली …

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शिबू का नया साल: गरीब विद्यार्थी की प्रेरक कहानी

शिबू का नया साल: गरीब विद्यार्थी की प्रेरक कहानी

नया साल आने वाला था और क्लास के सभी बच्चों में खुसुर पुसुर शुरू हो गई थी। सबको पता था कि इस साल भी प्रिंसिपल सर बच्चों के साथ नए साल पर कोई बढ़िया सा आइडिया लेकर आएँगे। क्लास का मॉनीटर दीपेश डस्टर से दस बार ब्लैक बोर्ड पोंछ चुका था पर प्रिंसिपल सर ने अभी तक एंट्री नहीं ली …

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क्रिसमस गिफ्ट: दादाजी की दिल छू लेने वाली कहानी

Grandfather

हर साल की तरह इस बार भी सब तरफ क्रिसमस के नज़दीक आते ही चारो ओर ही जोरो शोरो से तैयारियां शुरू हो चुकी थी। नन्हा जेम्स भी अपनी खिड़की से बाहर बाज़ार की ओर झाँककर खुश हो रहा था। आज सन्डे था और उसके पापा ने चर्च ले जाने का वादा किया था और उसके बाद उसे क्रिसमस ट्री …

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गब्बू का हैप्पी न्यू ईयर: नव वर्ष के उपलक्ष में हिंदी कहानी

गब्बू का हैप्पी न्यू ईयर: नव वर्ष के उपलक्ष में हिंदी कहानी

गब्बू भालू बेच तो गुब्बारे रहा था पर उसका पूरा ध्यान, पेड़ पर लगे शहद के छत्ते पर था। मधुमक्खियाँ भी कम शैतान नहीं थी। वे भी अपने छत्ते में आराम से बैठकर गब्बू को देख रही थी और हँस रही थी। उन्होंने टॉमी कुत्ते को थोड़ा सा शहद देकर अपनी तरफ़ मिला लिया था। टॉमी को शहद इतना पसँद …

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पुनर्जन्म: महिला दिवस के उपलक्ष में एक कहानी

महिला दिवस के उपलक्ष में एक कहानी: पुनर्जन्म

अचानक ऐसा लगता हैं जैसे सब खत्म हो गया और दूसरे ही पल फिर सब कुछ पहले जैसा हो गया। क्या समुद्र के किनारे आराम से बैठकर मिट्टी के बड़े-बड़े महल बनाते बच्चों ने सोचा होगा कि केवल एक लहर, सिर्फ एक लहर ही काफ़ी हैं, अथक परिश्रम से बनाये गए उनके आलीशान महल को अपने साथ ले जाने के …

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नई सुबह: साक्षरता प्रेरक प्रेरणादायक बाल कहानी

नई सुबह: साक्षरता प्रेरक प्रेरणादायक बाल कहानी

“काँच के अंदर झाँकने से किताब पढ़ने को नहीं मिल जाएगा” चाय की गुमटी से बापू गुस्से से चीखे जो लाइब्रेरी के पास ही बनी हुई थी। छोटू पर इस बात का कोई असर नहीं हुआ। वह चेहरे से बारिश की बूँदें पोंछता हुआ शीशे के अंदर देखता रहा। अंदर का दृश्य उसके लिए किसी स्वप्न लोक से कम नहीं …

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दादाजी की सीख: पर्यावरण संरक्षण पर बाल कहानी

दादाजी की सीख: पर्यावरण संरक्षण पर बाल कहानी

“सुबह से इस बन्दर ने हड़कंप मचा रखा है” मम्मी ने खड़की से बाहर की ओर झाँकते हुए कहा। मम्मी की बात सुनते ही टीनू ने पास रखी किताब उठाई और पढ़ने का नाटक करने लगा। मम्मी ने टीनू को देखा और कहा – “तुम सिर के बल क्यों नहीं खड़े हो जाते”? “क्यों मम्मी”? टीनू ने मासूमियत से पूछा। …

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सौदा: लालची बाप के बिकाऊ बेटे की हास्य कहानी

सौदा: लालची बाप के बिकाऊ बेटे की हास्य कहानी

मेरे पिताजी से ज्यादा दरियादिल और महान इंसान मैंने आज तक नहीं देखा। दरियादिल इसलिए क्योंकि उनके दिल में कंजूसी और कृपणता दोनों का दरिया पूरे वेग के साथ बहता है और महान इसलिए क्योंकि वह कंजूसी के साम्राज्य के वो महान सम्राट है जिनकी टक्कर में कोई खड़ा ही नहीं हो सकता। घर हो या बाहर, वो जहाँ भी …

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बाला की दिवाली: गरीबों की सूनी दिवाली की कहानी

बाला की दिवाली: गरीबों की सूनी दिवाली की कहानी

“माँ… पटाखे लेने है मुझे” बाला ने दिवार के कोने में बैठे हुए कहा। “कहाँ से ले दूँ?” बाला की माँ, शांता का तुरंत जवाब आया। “पर दिवाली में तो सब बच्चे पटाखे फोड़ते है” बाला ने एक और कोशिश करते हुए कहा। “हाँ, पर उनके मम्मी पापा के पास पैसे होते है?” माँ ने रस्सी पर कपड़े डालते हुए …

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