Stories For Kids

पढ़ाकू शेर: एक तोतले शेर की कहानी जो पढना चाहता है

पढ़ाकू शेर: एक तोतले शेर की कहानी जो पढना चाहता है

पढ़ाकू शेर: लेखिका ‘मंजरी शुक्ला’ चिड़ियाघर घूमते-घामते अचानक बबलू का सामना शेर से हो जाता है। डर के मारे बबलू के हाथ पैर काँपने लगते है। शेर हँसते हुए बोला – “डलो मत, मै सिर्फ़ तमातल और दाजल थाता हूँ”। “तुम… तुम तो तोतले हो!” बबलू ने आश्चर्य से कहा। “हाँ… थई पहचाना” शेर ने जवाब दिया। “मै परना चाहता …

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सूरज की सर्दी: मंजरी शुक्ला की बच्चों के लिए कहानी

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चारों ओर धुंध छाई हुई थी लोग आश्चर्य कर रहे थे कि सूरज क्यों नहीं निकला। पर बेचारा सूरज निकलता भी तो कैसे… वह तो आसमान में उकड़ूँ बैठा ठंड से काँप रहा था। सुबह से ही सूरज को बहुत ठंड लग रही थी। पर सूरज को इस तरह सर्दी में काँपते देख चाँद बहुत खुश था क्योंकि चाँद को …

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The Day Mother Raised The Flag: Moral Story

The Day Mother Raised The Flag

On August 15, at the stroke of midnight, the Indian flag replaced the Union Jack of the British Empire. And millions of Indians went to sleep in a state of excitement. For, they would literally wake up in a free country. Among them was a five-year-old girl called Amrita Rangasami. She lived with four siblings and a young widowed mother, …

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Bali and Hanuman: How Hanuman saved Sugriva

Bali and Hanuman - Learn how Hanuman saved Sugriva from Bali

Kishkindha was the capital of the kingdom of the monkeys ruled by King Bali. One day, a terrible fight broke out between Bali and his brother Sugriva. Sugriva was so afraid of Bali that he went away to live in a hill called Rishyamukha with his minister, Hanuman. Sugriva chose to live on Rishyamukha, because Bali was cursed regarding the hill. …

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अप्रैल फूल: मूर्ख दिवस की रोचक बाल-कहानी

अप्रैल फूल - डॉ. मंजरी शुक्ला

आज शैतान मोंटू बन्दर को सुबह से ही बहुत मजा आ रहा था। आखिर 1 अप्रैल जो आने वाला था। वह हर साल इस दिन का बेसब्री से इंतज़ार करता था। आखिर इस दिन लोगों को मूर्ख बनाने में कोई ज्यादा डांट भी नहीं पड़ती थी, वरना वो तो पूरे साल किसी ना किसी को तंग करने के चक्कर में हमेशा …

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प्रतिशोध: नारी उत्पीड़न की कहानी – मंजरी शुक्ला

प्रतिशोध - नारी उत्पीड़न की कहानी

दूर से आती आवाज़ को कभी गौर से सुनना नहीं पड़ा और जो सामने था उसकी स्पष्ट आवाज़ कभी कानों में आई नहीं। क्या, क्यों और कैसे शब्दों का कोई अर्थ नहीं रह गया था। किसी शान्त नदी के किनारे या उफ़नते समुद्र के ज्वर भाटे उसे एक सा ही सुकून देते थे। उसे खुद भी नहीं पता होता कि …

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नन्हे दोस्त: पक्षियों के लिए दाना-पानी की बाल-कहानी

नन्हे दोस्त: पक्षियों के लिए दाना-पानी की बाल-कहानी

“पूरी कॉलोनी में बस एक यही पेड़ बचा है हमारे लिए” नीतू गौरिया ने चुलबुल तोते से कहा। “मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा है कि सब लोग पेड़ कटवा क्यों रहे है” चुलबुल ने दुखी होते हुए कहा। “अरे, तुम दोनों कहाँ चले गए थे?” पेड़ के झुरमुट से टिन्नू गिलहरी की आवाज़ आई। नीतू चहकते हुए बोली …

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शिबू का नया साल: गरीब विद्यार्थी की प्रेरक कहानी

शिबू का नया साल: गरीब विद्यार्थी की प्रेरक कहानी

नया साल आने वाला था और क्लास के सभी बच्चों में खुसुर पुसुर शुरू हो गई थी। सबको पता था कि इस साल भी प्रिंसिपल सर बच्चों के साथ नए साल पर कोई बढ़िया सा आइडिया लेकर आएँगे। क्लास का मॉनीटर दीपेश डस्टर से दस बार ब्लैक बोर्ड पोंछ चुका था पर प्रिंसिपल सर ने अभी तक एंट्री नहीं ली …

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Santa and the Christmas gift: Children’s Story

Santa and the Christmas gift: Children's Story

Santa was in a fix. He was forced to unwrap and use one of the gifts, which was a little girl’s rather unusual request. How would he make it up to her, he wondered. As winter was spreading its freezing arms to cover all mountains and meadows alike, Santa excitedly rubbed his gloved palms. He was supervising the Christmas preparations. …

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