Manjari Shukla

I am writer, broadcaster, teacher and presenter of TV Programmes. I have penned more than 350 stories for children in English and Hindi. These stories have been published in various reputed children’s magazines like Nandan, Bal hans, Sneh, Sanskaar, Kadambini, Suman-saurabh, Magic-Pot, Sarita, Jaagran sakhi, Children’s World, Tinkle, Dimdima, Little Words and The Children’s magazines. My stories and articles have also been published in various journals and papers in India like Dainik Jaagran, Jansatta, Navbharat, Naidunia, Amar Ujala, Rashtriya Hindi Mail, The Pioneer, DNA, The chronicle and The Hindu. My Published Books are " Sweety's Rainy Day and Jadui Gubbare." I have received many awards also in writing. My work is also available on Net. I am Ph.D. in English Literature and hail from Lucknow. Presently I am working as an announcer in All India Radio in Allahabad. E-mail: manjarishukla28@gmail.com Present Address: क्वार्टर नंबर D-1433, इंडियन ऑयल कारपोरेशन लिमिटिड, रिफाइनरी टाउनशिप विलेज एन्ड पोस्ट - बहोली, पानीपत, हरयाणा - 132140

पितृ दिवस पर कहानी: बाबूजी

Hindi Moral Story about a School Teacher परोपकार

जब ईश्वर जरुरत से ज्यादा झोली में गिर देता हैं तो वह भी मनुष्य के लिए अहंकार और पतन का कारण बन जाता हैं। ऐसा ही कुछ हुआ चाँदनी के साथ… सभ्य, सुशील और बेहद महत्वकांशी चाँदनी को जब महात्मा गाँधी के आदर्शों पर जीवन पर्यन्त चलने वाले ईमानदार और अकेले बाबूजी ने उसे पहली बार सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल …

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नशा: तम्बाकू सेवन के हानिकारक प्रभाव और पश्चाताप की कहानी

नशा - पश्चाताप की कहानी

क्या चाचा, लो जरा सा आईना तो देख लो… कितने दिन हो गए तुमने बाल भी नहीं सँवारे। सूरज की आवाज़ से मैं खिड़की से बाहर झाँकता हुआ जैसे नींद से जागा। मैंने पनियल आँखों से सूरज की ओर देखा, जो मेरा भतीजा था पर आज मेरे बेटे से बढ़कर मेरा साथ दे रहा था। वो मेरी मन-स्तिथि समझ गया …

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माँ: दिल छू जाने वाली हिंदी कविता

माँ - दिल छू जाने वाली हिंदी कविता

मै तेरा गुनेहगार हूँ माँ मै तुझे भूल गया उन झूठे रिश्तो के लिए जो मैंने बाहर निभाए उन झूठे नातो के लिए जो मेरे काम ना आये मै तेरा गुनेहगार हूँ माँ बॉस के कुत्ते को कई बार डॉक्टर को दिखाना पड़ा पुचकार कर उसे खुद अपना हाथ भी कटवाना पड़ा पर तेरा चश्मा न बनवा पाया तुझे दवा …

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विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष बाल कहानी: बंटी की दादी

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष

ना जाने कहाँ छुपा बैठा हैं ये, रोज का इसका यह तमाशा हैं… आवाज़ लगा लगा कर तो मेरा गला दुःख गया हैं… मीनू उसे ढूंढते हुए बगीचे तक आ गई थी। आम के पेड़ के पीछे छुपे बैठे तीन साल के बंटी को देखकर मीनू का गुस्सा सातवे आसमान पर पहुँच गया था। उसने ना आव देखा ना ताव …

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नन्हे छोटू की बड़ी कहानी: मानवाधिकार पर बाल-कहानी

नन्हे छोटू की बड़ी कहानी: मानवाधिकार पर बाल-कहानी

सर्दी की छुट्टियाँ आ गई थी और रिमझिम के तो खुशी के मारे पैर ज़मीन पर ही नहीं पड़ रहे थे। उसके पापा उसे उसकी बेस्ट फ्रैंड स्वाति के घर छोड़ने के लिए तीन दिन के लिए तैयार हो गए थे। रिमझिम और स्वाति एक दूसरे के साथ जी भर कर मस्ती करना चाहती थी, इसलिए दोनों ही बहुत खुश …

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अधर-अधर पर हो मुस्कानें: डॉ. मंजरी शुक्ला

अधर-अधर पर हो मुस्कानें Inspirational New Year Hindi Poem

अभिनव राहें नवल सुपथ हो नूतन वर्षाभिनंदन। यहीं शुभेच्छा नव आशाओं से पूरित हो हर जीवन। तिमिर तिरोहित करता उज्ज्वल संकल्पों का दीप जले। उर अन्तस में सदा सर्वदा शुभम सुमंगल भाव पले। हृदय शुद्धि ही प्रबल प्रेरणा बन छाए मानस प्रतिक्षण। यहीं प्रेरणा नव आशाओं से पूरित हो हर जीवन। अभिनव राहें नवल सुपथ हो नूतन वर्षाभिनंदन। यहीं शुभेच्छा …

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न्यू ईयर रिजोल्यूशन: मंजरी शुक्ला

न्यू इअर रिज़ोल्यूशन Children's Story about New Year Resolution

सुना है, इस बार नए साल पर सागर की मम्मी ने उसे एक जादुई मेज लाकर दी है – बिन्नी बोली। क्या कह रही हो, जादुई मेज – अमित बोला। और क्या देखा नहीं, उस मेज के आने के बाद से अब सागर कितना बदल गया है? हाँ… वो तो है… पढ़ाकू राम बन गया है अपना सागर तो… नेहा …

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मन्नत की दीवाली: मंजरी शुक्ला

Inspirational Hindi Story about Diwali Festival मन्नत की दीवाली

मैं आपसे कब से कह रही हूँ, पर आप मुझे इस दिवाली पर नई पेंसिल, नए पेन और नया बस्ता दिलवा ही नहीं रही है… मन्नत ने गुस्से से अपनी माँ से कहा। माँ भी दिवाली नज़दीक आने के कारण घर की साफ़ सफ़ाई कर रही थीI सुबह से लगातार काम करते हुए वो भी बुरी तरह थक चुकी थी, …

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सच्ची दीपावली: मंजरी शुक्ला

Inspirational story of a poor man's Diwali सच्ची दीपावली

दीपावली का पर्व नजदीक आ रहा था और स्कूल में सभी बच्चों के मन में मानों खुशियों के पंख लग गए थे और वे तमाम तरीके से रोज नए पटाखों की लिस्ट बनाते और फिर अचानक दूसरे पटाखे याद आ जाते तो पहली लिस्ट के चिंदे करके चारों ओर उड़ा देते। कोई अपने लिए नए कपड़े खरीदने का सोच रहा …

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नवरात्र का बदलता स्वरुप: मंजरी शुक्ला

Navratri Festival Celebrations: Then and Now नवरात्र का बदलता स्वरुप

“वंदे भूतेश मातृ रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नम नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।” हिंदू संस्कृति में मातृ स्थान प्रथम है। सनातन आदि काल से नवरात्र पूजा चली आ रही है। पितृपक्ष की समाप्ति के दूसरे ही दिन कलश स्थापना के साथ ही माँ दुर्गा की आराधना प्रारंभ हो जाती हैं। दुर्गा पूजा का पर्व भारतीय सांस्कृतिक पर्वों में सबसे ज़्यादा लोकप्रिय है। …

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