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Manjari Shukla

I am writer, broadcaster, teacher and presenter of TV Programmes. I have penned more than 350 stories for children in English and Hindi. These stories have been published in various reputed children’s magazines like Nandan, Bal hans, Sneh, Sanskaar, Kadambini, Suman-saurabh, Magic-Pot, Sarita, Jaagran sakhi, Children’s World, Tinkle, Dimdima, Little Words and The Children’s magazines. My stories and articles have also been published in various journals and papers in India like Dainik Jaagran, Jansatta, Navbharat, Naidunia, Amar Ujala, Rashtriya Hindi Mail, The Pioneer, DNA, The chronicle and The Hindu. My Published Books are " Sweety's Rainy Day and Jadui Gubbare." I have received many awards also in writing. My work is also available on Net. I am Ph.D. in English Literature and hail from Lucknow. Presently I am working as an announcer in All India Radio in Allahabad. E-mail: manjarishukla28@gmail.com Present Address: क्वार्टर नंबर D-1433, इंडियन ऑयल कारपोरेशन लिमिटिड, रिफाइनरी टाउनशिप विलेज एन्ड पोस्ट - बहोली, पानीपत, हरयाणा - 132140

छोटे बच्चों की हास्यप्रद कहानी: बरगद का चश्मा

छोटे बच्चों की हास्यप्रद कहानी: बरगद का चश्मा

फूलों से लदे हुए जंगल में चारों तरफ़ रंगबिरंगी तितलियाँ उड़ रही थी। भौरें गुनगुना रहे थे और चारों तरफ़ ठंडी ठंडी हवा बह रही थी। सभी बहुत खुश थे पर अगर कोई उदास था तो वह था बरगद का पेड़। और उसकी इस उदासी का कारण था उसका सबसे अच्छा दोस्त बादल। अब ये भी सोचने की बात है …

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दिवाली की रात: दिवाली पर हिंदी जासूसी कहानी

Hindi Detective Story about Diwali and Thieves दीवाली की रात

चन्दन चौदह वर्षीय एक चंचल और चतुर लड़का था। घर से लेकर स्कूल तक सभी उसकी बुद्धिमानी का लोहा मानते थे। जितना वह पढ़ाई लिखाई में अच्छा था उतना ही खेल कूद में भी। हर साल की तरह इस बार भी उसने और उसके दोस्तों ने दिवाली को बड़े ही धूम-धाम से मनाने का निश्चय किया। बच्चों की टोली जब …

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दिवाली के पटाखों की बाल-कहानी: दिवाली

Children's Hindi Story about Diwali Festival दिवाली

एक दुकान में ढेर सारे पटाखे सजे हुए रखे थे, जो दुकानदार ने दिवाली पर बेचने के लिए रखे हुए थे। पटाखों को यह देखकर बहुत दुःख होता था की जो बच्चे अच्छे कपड़े पहनकर अपने मम्मी पापा के साथ पटाखे लेने आते, उन्हें तो दुकानदार बड़े ही प्यार से पटाखे दिखता और बेचता पर जो बच्चे नंगे पैर और …

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चुन्नू की इको फ्रेंडली दिवाली: जन जागरूकता पर कहानी

इको फ्रेंडली दिवाली

सात साल का चुन्नू सुबह से ही पटाखे खरीदने की जिद कर रहा था। वह पापा के पास आते हुए बोला – “पटाखे लेने चलो, मेरे सब दोस्त ले आये है”। “अरे, बेटा, तुम पहले अपना होमवर्क तो खत्म कर लो फ़िर समय नहीं मिलेगा”। “अभी तो स्कूल खुलने में चार दिन है, आप पहले पटाखे लेने चलो”। हारकर पापा …

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प्रेरणादायक हिंदी बाल-कहानी: बिट्टू की दिवाली

आई रे आई दिवाली - टीना जिंदल

बहुत सारे पटाखे, मिठाई और नए नए कपड़े चाहिए मुझे इस दिवाली पर… कहता हुआ नन्हा बिट्टू पैर पटककर माँ के सामने जमीन पर ही लोट गया। उसकी मम्मी ने अपनी हँसी को दबाते हुए कहा – “हाँ – हाँ, सब ले आयेंगे”। यह सुनकर बिट्टू बड़े ही लाड़ से माँ के गले में हाथ डालता हुआ फुसफुसाया, मानों किसी खजाने …

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चूहों की दिवाली: चतुर चूहों की चटपटी कहानी

चूहों की दिवाली: चतुर चूहों की चटपटी कहानी

जब से चूहों को पता चला था कि दिवाली आने वाली है तो उनमें कानाफूसी शुरू हो गई थी। सबने मिलकर एक शाम को एक मीटिंग करने का निश्चय किया। छोटा चूहा, मोटा चूहा, लम्बा चूहा, नाटा चूहा, कोई भी नहीं छूटा… सब भागते हुए मीटिंग अटेंड करने जा पहुँचे थे। मीटिंग की राय देने वाले नाटू चूहे की तो ख़ुशी देखते ही बन …

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हास्यप्रद बाल-कहानी: ऐसे मना दशहरा

हास्यप्रद बाल-कहानी: ऐसे मना दशहरा

“दशहरे पर मैं रावण देखने जाऊंगी” दस साल की चित्राणी ने एलान कर दिया। “और मैं हमेशा की तरह नहीं ले जाऊँगा” पापा ने अखबार पढ़ते हुए ही जवाब दिया। “क्या हो जाएगा, अगर हम लोग रावण देखने चले जाएँगे… पूरी दुनिया तो जाती है” मम्मी ने हर साल की तरह रटा रटाया वाक्य दोहराया। मम्मी की बात पर चित्राणी …

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अनोखा दशहरा: हास्यप्रद कहानी सोने के पत्तों की

अनोखा दशहरा: मंजरी शुक्ला

बहुत समय पहले की बात हैं। उदयपुर राज्य में एक राजा राज्य करता था माधोसिंघ। उसके दिमाग में रह रह कर तरह तरह के फ़ितूर आते रहते थे। इस कारण कभी तो उसकी हरकतों पर लोग हँसते हँसते लोटपोट हो जाते तो कई बार उसे सबके साथ इसका खामियाज़ा भी भुगतना पड़ता पर वो अपनी पुरानी गलतियों से सीख ना लेते हुए एक …

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शिबू ने लालटेन जलाई – सबने दिवाली मनाई: मंजरी शुक्ला

शिबू ने लालटेन जलाई - सबने दिवाली मनाई: मंजरी शुक्ला

बहुत समय पहले की बात है… एक गाँव था शिवपुर। उसी गाँव में एक चरवाहा रहता था, बहुत ही सीधा और भोला-भाला बिना किसी लालच और बिना किसी स्वार्थ के सबके दुःख सुख में एक पैर से खड़ा रहता था। गाँव वाले भी उसकी निश्चलता के कारण उसे बहुत प्यार करते थे। शिबू बड़ी ही मेहनत से गाँव वालों की …

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