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Gopal Singh Nepali

Gopal Singh Nepali [11 August, 1911 - 17 April, 1963] was an eminent Bihari Indian poet of Hindi literature and a famous lyricist of Bollywood. His association with Bollywood spanned around two decades, beginning in 1944 and ended with his death in 1963. He was a poet of post-Chhayavaad period, and he wrote several collections of Hindi poems including "Umang" (published in 1933). He was also a journalist and edited at least four Hindi magazines, namely, Ratlam Times, Chitrapat, Sudha, and Yogi. He was born in Bettiah in the state of Bihar. Although he was of Nepali descent, he did not have much of his heritage. During Sino-Indian War of 1962, he wrote many patriotic songs and poems which include Savan, Kalpana, Neelima, Naveen Kalpana Karo etc. He is also known for his seminal volume "The Newars: An Ethno-Sociological Study of a Himalayan Community" (1965), made into a book from his doctoral dissertation.

हिमालय से भारत का नाता: गोपाल सिंह नेपाली

हिमालय से भारत का नाता - गोपाल सिंह नेपालीहिमालय से भारत का नाता - गोपाल सिंह नेपाली

Currently, we face confrontation on our northern border. China from across Himalaya is becoming aggressive. Here is an old and famous poem of Gopal Singh Nepali about the relationship of Himalaya with India. गोपाल सिंह नेपाली (Gopal Singh Nepali) का 11 अगस्त 1911 को बेतिया, पश्चिमी चम्पारन (बिहार) में जन्म हुआ। गोपाल सिंह नेपाली को हिन्दी के गीतकारों में विशेष …

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विश्व–सुंदरी Gopal Singh Nepali Hindi Poem about Beauty Queen

विश्व–सुंदरी Gopal Singh Nepali Hindi Poem about Beauty Queen

जल रहा तुम्हारा रूप–दीप कुंतल में बांधे श्याम घटा नयनों में नभ की नील छटा अधरों पर बालारुण रंजन मृदु आनन में शशी–नीराजन जल रहा तुम्हारा रूप–दीप भौंहों में साधे क्षितिज–रेख तुम अपनी रचना रहीं देख हाथों में विश्व–कमल सुन्दर मधु–मधुर कंठ में कोकिल–स्वर जल रहा तुम्हारा रूप–दीप सुन्दरी तुम्हारे कुसुम बाण उड़ चले चूमने प्राण–प्राण दिशिदिशि से जयजयकार उठा …

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Gopal Singh Nepali Spring Season Hindi Film Song बहारें आएँगी, होंठों पे फूल खिलेंगे

Gopal Singh Nepali Spring Season Hindi Film Song बहारें आएँगी, होंठों पे फूल खिलेंगे

बहारें आएँगी, होंठों पे फूल खिलेंगे सितारों को मालूम था, हम दोनों मिलेंगे बहारें आएँगी… सितारों को मालूम था छिटकेगी चाँदनी, सजेगा साज प्यार का बजेगी पैंजनी बसोगे मन में तुम तो मन के तार बजेंगे सितारों को मालूम था, हम दोनों मिलेंगे बहारें आएँगी… मिला के नैन हम-तुम दो से एक हो गए अजी हम तुम पे पलकें उठाते ही खो गए – …

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Gopal Singh Nepali Inspirational Hindi Poem on Frustration कुछ ऐसा खेल रचो साथी

Gopal Singh Nepal Inspirational Hindi Poem on Frustration कुछ ऐसा खेल रचो साथी

कुछ ऐसा खेल रचो साथी कुछ जीने का आनंद मिले कुछ मरने का आनंद मिले दुनियां के सूने आंगन में कुछ ऐसा खेल रचो साथी वह मरघट का सन्नाटा तो रह रह कर काटे जाता है दुख दर्द तबाही से दब कर मुफ़लिस का दिल चिल्लाता है यह झूठा सन्नाटा टूटे पापों का भरा घड़ा फूटे तुम जंजीरों की झनझन …

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Gopal Singh Nepali Hindi Bal-Kavita यह लघु सरिता का बहता जल

Gopal Singh Nepali Hindi Bal-Kavita यह लघु सरिता का बहता जल

यह लघु सरिता का बहता जल‚ कितना शीतल‚ कितना निर्मल। हिमगिरि के हिम निकल–निकल‚ यह विमल दूध–सा हिम का जल‚ कर–कर निनाद कलकल छलछल‚ बहता आता नीचे पल–पल। तन का चंचल‚ मन का विह्वल। यह लघु सरिता का बहता जल। निर्मल जल की यह तेज धार‚ करके कितनी श्रृंखला पार‚ बहती रहती है लगातार‚ गिरती–उठती है बार बार। रखता है …

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Gopal Singh Nepali Hindi Love Poem यह दिल खोल तुम्हारा हँसना

Gopal Singh Nepali Hindi Love Poem यह दिल खोल तुम्हारा हँसना

प्रिये तुम्हारी इन आँखों में मेरा जीवन बोल रहा है बोले मधुप फूल की बोली, बोले चाँद समझ लें तारे गा–गाकर मधुगीत प्रीति के, सिंधु किसी के चरण पखारे यह पापी भी क्यों–न तुम्हारा मनमोहम मुख–चंद्र निहारे प्रिये तुम्हारी इन आँखों में मेरा जीवन बोल रहा है देखा मैंने एक बूँद से ढँका जरा आँखों का कोना थी मन में …

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